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Sunday, 2 October 2016

माता शैलपुत्री: प्रथम नवदुर्गा


       

नवरात्र क्या है? नौ दिन नौ देवी के नौ रुपो की उपासना या देवी के माध्यम से स्त्री के स्त्रित्व उसकी महानता और उसकी शक्ति को इन नौ दिनो में लोगो के सामने लाना और उन्हें एहसास दिलाना कि स्त्री की शक्ति में कोई कमी नहीं है। देवी के नौ रुप स्त्री के रुप की तरह है। पुरूष के जीवन में स्त्री एक अभिन्न अंग होती हैं। जीवन के हर मोड़ पर हमे स्त्री के रुप में कभी माँ, कभी बहन, कभी पत्नी, बेटी और प्रेमिका की आवष्यकता होती है। इन्ही रुपो को हमेषा सम्मान और आदर की आवष्यकता होती है। हम नवरात्र को नौ दिनो तक पुरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते है। देवी के आगमन में, उनके स्वागत में, कोई कमी ना रह जाए इसका ध्यान रखते है, मगर नौ दिनों के अलावा साल के बाकी दिन क्या हम यह सब कर पाते हैं? नौ दिन का सम्मान बाकी दिनों तक भी जारी रखिए। नवरात्री का प्रथम दिवस और उनका शानदार आगाज करिए। माँ शैलपुत्री से दुर्गा के प्रथम दिवस का आगाज हो रहा है। परिवार सहित उनका स्वागत करिए और पुरे साल अपने आस-पास खुशियाँ फैलाए।

                    वन्दे वाच्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतषेखराम।
                    वृषारूढ़ा शूलधरा शैलपुत्री  यषस्विनीम्।।

माँ दुर्गा को प्रथम शैलपुत्री के रुप में पूजा जाता है। शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती है। देवी के दाँए हाथ में त्रिषूल और बाँए हाथ मे कमल सुषोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा और सती के नाम से भी जानी जाती है।

नवरात्री मे देवी दुर्गा के नौ रुपो को पुजा जाता है। दुर्गाजी का प्रथम स्वरुप शैलपुत्री है। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रुप में उत्पन्न होने के कारण इन्हें शैलपुत्रीके नाम से जाना जाता है। नवरात्र पूजन में प्रथम दिवस इन्ही की पूजा और आराधना की जाती है। देवी के दाँए हाथ मे त्रिशूल और बाँए हाथ मे कमल सुशोभित है। इन्हे सती के नाम से भी जाना जाता है। शैलपुत्री शिवजी की अर्धांगिनी है। इनका महत्व और शक्ति अनंत है। ये देवी वन के सभी जीव-जन्तुओं की रक्षक भी है। माँ शैलपुत्री को कालरात्री, महागौरी, सिद्धिदात्री, स्कंदमाता आदि नामो से भी जाना जाता है। शैलपुत्री संकल्प-दृढ़ता की देवी है। माँ शैलपुत्री विद्याप्राप्ति, साधना की प्राप्ति, आदि में मदद करती है। देवी को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
                   
                     वन्दे वाच्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतषेखराम।
                     वृषारूढ़ा शूलधरा शैलपुत्री  यषस्विनीम्।।

आइए हम सब मिलकर नवरात्र के पहले दिन का आरंभ मन में शुभ भावो और सबके सुख की कामना करते हुए करे और इन नौ दिनों मे देवी के नौ स्वरुपो से जुड़ी इन धर्म यात्रा में हमारे साथ चले।